दूसरी राय लेना
दूसरी राय लेना अपने पहले डॉक्टर का अपमान नहीं है। कैंसर के इलाज में यह दुनिया भर में सामान्य चलन है। इतनी बड़ी बीमारी में पूरी तसल्ली कर लेना आपका हक है।
दूसरी राय कब लेनी चाहिए
- 01किसी भी बड़ी सर्जरी से पहलेखासकर तब, जब कोई अंग निकाला जा रहा हो, चेहरा बदलने वाला हो, या फैसला पलटा न जा सके
- 02जब आपसे कहा जाए कि अब कुछ नहीं हो सकताइलाज की गुंजाइश हर सेंटर पर अलग होती है। एडवांस स्टेज का मतलब हमेशा लाइलाज नहीं होता
- 03जब योजना में रिकंस्ट्रक्शन शामिल न होमुंह, सिर और गर्दन के कैंसर में निकालने और दोबारा बनाने, दोनों की योजना साथ बननी चाहिए
- 04जब बताया गया खर्च आपकी पहुंच से बाहर लगेहो सकता है कोई दूसरा सेंटर उसी केस का इलाज आयुष्मान या मुख्यमंत्री कोष के तहत कर दे
- 05जब मन में बस कहीं कुछ खटक रहा होयही एक वजह अपने आप में काफी है
हमसे दूसरी राय कैसे लें
अपनी रिपोर्ट व्हाट्सएप पर भेज दीजिए — बायोप्सी, स्कैन, और जो इलाज की योजना आपको बताई गई है वह भी। सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट आपके आने से पहले ही उन्हें देख लेते हैं, जिससे बातचीत आपके केस से शुरू होती है, शून्य से नहीं। या फिर सब कुछ लेकर सीधे किसी भी ओपीडी में आ जाइए।
इसके लिए न किसी रेफरल की जरूरत है, न अपने मौजूदा डॉक्टर की इजाजत की, और न ही आपको कोई सफाई देनी है। आपकी रिपोर्ट आपकी अपनी हैं।
हम आपको क्या बताएंगे
कई बार जवाब यही होता है कि आपकी मौजूदा योजना सही है, और आपको बेझिझक आगे बढ़ना चाहिए। जब ऐसा हो, हम यह साफ कह देते हैं। जो दूसरी राय हर बार पहली से उलट निकले, वह इलाज नहीं, बिक्री है। और जहां हम कुछ अलग करते, वहां आपको ठीक-ठीक बताया जाएगा कि क्या अलग करते, क्यों करते, और उसका खर्च क्या होता।
हमें बायोप्सी की रिपोर्ट भेजिए। हम साफ-साफ बताएंगे कि मामला कहां तक है।
दूसरी राय लेने में आपका कुछ खर्च नहीं होता, और इससे अक्सर इलाज की योजना बदल जाती है। अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप पर भेजिए — आपके पहली बार आने से पहले ही एक कैंसर सर्जन उन्हें देख लेंगे।