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खर्च और सरकारी योजनाएं

आयुष्मान भारत में कैंसर का इलाज, आसान शब्दों में।

आपके परिवार के पास आयुष्मान कार्ड है, तो कैंसर की सर्जरी, कीमोथेरेपी और अस्पताल में भर्ती पर आपका एक पैसा भी खर्च नहीं हो सकता — हर परिवार को साल में ₹5 लाख तक। यह असल में कैसे काम करता है, यहां बिना भारी-भरकम शब्दों के लिखा है।

कौन पात्र है

पीएम-जेएवाई में सरकार के SECC डेटाबेस में चिह्नित परिवार आते हैं, और उत्तर प्रदेश में कुछ और श्रेणियां भी। आपके घर में किसी के पास आयुष्मान कार्ड हो — या आपको पता ही न हो कि आप पात्र हैं या नहीं — तो जो कागज आपके पास हों, वही लेकर आ जाइए। हमारे काउंसलर कुछ ही मिनटों में सरकारी पोर्टल पर आपकी स्थिति जांच देंगे। जांचने का कोई पैसा नहीं लगता, और इससे आप किसी बात के लिए बंध भी नहीं जाते।

कैंसर में क्या-क्या कवर है

  • 01कैंसर की सर्जरीमंजूर पैकेज में ऑपरेशन, सर्जन, बेहोशी, ऑपरेशन थिएटर और इम्प्लांट
  • 02Chemotherapyमंजूर नियमों के अनुसार दवाओं की साइकिल, डे-केयर में या भर्ती होकर
  • 03अस्पताल में भर्तीकवर की गई भर्ती के दौरान बिस्तर, नर्सिंग, दवाएं और खाना
  • 04भर्ती से पहले और बाद का खर्चभर्ती के आगे-पीछे तय अवधि की जांचें और दवाएं

हमारे यहां यह प्रक्रिया कैसे चलती है

CoreOnco नेटवर्क का हर अस्पताल — लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, अमेठी और लखीमपुर खीरी — इस योजना के साथ काम करता है। इसलिए पात्रता की जांच और इलाज की योजना, दोनों उस केंद्र पर हो सकती हैं जो आपके सबसे पास है।

  • कदम 1अपना कार्ड और रिपोर्ट लाइएआयुष्मान कार्ड (या राशन कार्ड / SECC का ब्योरा), बायोप्सी, स्कैन — जो भी आपके पास हो
  • कदम 2हम जांच करके पूर्व-मंजूरी लेते हैंहमारे काउंसलर पात्रता पक्की करते हैं और बीमा कंपनी के पास पूर्व-मंजूरी की अर्जी लगाते हैं — दस्तखत आप करते हैं, कागजी काम हम
  • कदम 3इलाज शुरू हो जाता हैमंजूर पैकेज कैशलेस होते हैं: न जमा राशि, न कवर किए गए इलाज का छुट्टी के दिन कोई बिल

यह बात हम आपको हमेशा साफ बताएंगे

हर इलाज की हर एक चीज हमेशा पैकेज के भीतर नहीं होती — कभी-कभी कोई खास इम्प्लांट, दवा या जांच कवर से बाहर पड़ जाती है। आपके मामले में ऐसा हुआ, तो पूरी रकम आपको इलाज से पहले लिखकर बताई जाएगी, बाद में कभी नहीं। "बिल में कोई चौंकाने वाली बात नहीं" हमारे यहां एक नियम है, कोई नारा नहीं।

आम सवाल

मेरा कार्ड दूसरे जिले का है। क्या वह लखनऊ में चलेगा?
हां। पीएम-जेएवाई पूरे भारत में चलता है — यूपी या किसी भी दूसरे राज्य में बना कार्ड किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में काम करता है।
कार्ड नहीं बना है, लेकिन लगता है कि हम पात्र हैं। क्या करें?
फिर भी आ जाइए, राशन कार्ड या आधार लेकर। पात्रता सरकारी पोर्टल पर जांची जा सकती है, और आपका परिवार डेटाबेस में हुआ तो कार्ड बन भी सकता है — हमारे काउंसलर पूरी प्रक्रिया में आपके साथ रहेंगे।
कोई सीमा है?
हर परिवार को साल में ₹5 लाख, जो परिवार के सभी सदस्यों में बंटता है और हर साल नया हो जाता है। कैंसर की ज्यादातर सर्जरी और कीमोथेरेपी इसी के भीतर आ जाती हैं। किसी योजना का इससे आगे निकल जाने का खतरा हो, तो हम शुरू करने से पहले बता देते हैं और बाकी रकम के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष का रास्ता देखते हैं।
अगर मैं पीएम-जेएवाई के लिए पात्र ही नहीं हूं?
यूपी के राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस योजना है, और शिक्षकों के लिए मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस योजना। बाकी हालात में मुख्यमंत्री राहत कोष, सरकारी और सैन्य परिवारों के लिए सीजीएचएस तथा ईसीएचएस, और निजी बीमा काम आते हैं — और हमारे काउंसलर वही निकालेंगे जो आप पर लागू हो। शुरुआत बातचीत से कीजिए, बिल से नहीं।
अगला कदम

हमें बायोप्सी की रिपोर्ट भेजिए। हम साफ-साफ बताएंगे कि मामला कहां तक है।

दूसरी राय लेने में आपका कुछ खर्च नहीं होता, और इससे अक्सर इलाज की योजना बदल जाती है। अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप पर भेजिए — आपके पहली बार आने से पहले ही एक कैंसर सर्जन उन्हें देख लेंगे।