पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना
उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और उनके आश्रित स्टेट हेल्थ कार्ड के जरिए कैंसर का इलाज करा सकते हैं, अस्पताल में पैसे दिए बिना। CoreOnco इस योजना में मरीजों का इलाज करता है — कार्ड और अपनी रिपोर्ट लेकर आइए, मंजूरी की सारी कार्रवाई हमारे काउंसलर संभालते हैं।
किन्हें कवर मिलता है
यह योजना उत्तर प्रदेश सरकार के सेवारत कर्मचारियों, सेवानिवृत्त राज्य कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारजनों के लिए है। इसकी शुरुआत 2022 में हुई, और इसे साचीज (SACHIS) चलाती है — वही राज्य एजेंसी जो उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत भी चलाती है। हर लाभार्थी को एक स्टेट हेल्थ कार्ड मिलता है, और अस्पताल में यही कार्ड देखा जाता है।
योजना में कितना मिलता है
- कवरसूचीबद्ध निजी अस्पतालहर परिवार को साल में ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज
- कवरसरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेजइलाज पर कोई आर्थिक सीमा नहीं
- दायराकैंसर का इलाजसर्जरी, कीमोथेरेपी और भर्ती, जहां ये योजना के मंजूर पैकेज के भीतर आएं — आपके केस का पैकेज भर्ती से पहले हमारे काउंसलर पक्का करते हैं
हमारे यहां इलाज कैसे होता है
- कदम 1कार्ड और रिपोर्ट लाइएस्टेट हेल्थ कार्ड, कर्मचारी या पेंशन पहचान पत्र, आधार, और आपके पास मौजूद हर मेडिकल रिपोर्ट
- कदम 2हम कवर पक्का करते हैंभर्ती से पहले हमारे काउंसलर कार्ड और लागू पैकेज की जांच करते हैं और योजना की मंजूरी की औपचारिकताएं पूरी करते हैं
- कदम 3इलाज कैशलेस होता हैकवर किए गए इलाज का बिल योजना को जाता है, आपको नहीं
यह बात हम आपको हमेशा बताएंगे
इलाज की दरें योजना के पैकेज तय करते हैं, और कभी-कभी कोई खास इम्प्लांट, दवा या जांच उनसे बाहर पड़ जाती है। आपकी योजना में कुछ भी कवर से बाहर हो, तो पूरी रकम आपको इलाज से पहले लिखकर बताई जाती है, छुट्टी के दिन कभी नहीं। लंबे इलाज में ₹5 लाख की पारिवारिक सीमा पार होने का खतरा हो, तो यह बात भी शुरू होने से पहले बता दी जाती है, साथ में यह भी कि और कौन सा कवर लागू होता है।
आम सवाल
मैं पेंशनभोगी हूं। क्या मुझे कवर मिलेगा?
मेरा स्टेट हेल्थ कार्ड अभी नहीं बना है। क्या करूं?
क्या इस योजना में कैंसर की सर्जरी कवर है?
क्या CoreOnco कागजी काम के पैसे लेता है?
हमें बायोप्सी की रिपोर्ट भेजिए। हम साफ-साफ बताएंगे कि मामला कहां तक है।
दूसरी राय लेने में आपका कुछ खर्च नहीं होता, और इससे अक्सर इलाज की योजना बदल जाती है। अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप पर भेजिए — आपके पहली बार आने से पहले ही एक कैंसर सर्जन उन्हें देख लेंगे।