पेट और आंत का कैंसर
भोजन नली (इसोफेगस), पेट, बड़ी आंत, मलाशय, लिवर, पित्ताशय और अग्न्याशय — इन सबके कैंसर इसमें आते हैं। इनके शुरुआती लक्षण रोजमर्रा की पाचन संबंधी तकलीफों जैसे ही लगते हैं। ठीक इसी वजह से, जो तकलीफ बनी रहे उसे एंटासिड का एक और कोर्स नहीं, जांच चाहिए।
संक्षेप में
बदहजमी, एसिडिटी और शौच की आदत में बदलाव आमतौर पर बेकसूर होते हैं। ये तब सामान्य नहीं रह जाते जब कुछ हफ्तों से ज्यादा बने रहें, बार-बार लौटें, या इनके साथ कोई खतरे का संकेत हो — निगलने में तकलीफ, काला शौच, शौच में खून, उल्टी, बिना वजह वजन घटना, या नया पीलिया। ऐसे में एंडोस्कोपी या स्कैन जरूरी है। ये आसान जांचें हैं। या तो ये आपको पूरी तरह निश्चिंत कर देती हैं, या कैंसर को तब पकड़ लेती हैं जब उसका ऑपरेशन अब भी हो सकता है।
पेट और आंत के कैंसर के लक्षण
- 01खाना नीचे जाते हुए अटकनाठोस खाना निगलने में दिक्कत — भोजन नली के कैंसर का सबसे जाना-पहचाना संकेत
- 02लगातार बदहजमी या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्दहफ्तों चलने वाली, या 45 की उम्र के बाद नई शुरू हुई
- 03काला, तारकोल जैसा शौच या शौच में खूनपाचन तंत्र में कहीं भी खून बहना कभी सामान्य नहीं होता
- 04शौच की आदत में बदलावनई कब्ज, दस्त या पतला शौच, जो तीन हफ्ते से ज्यादा चले
- 05बिना वजह वजन घटना या भूख न लगनाकुछ निवाले में ही पेट भर जाना, बिना डाइटिंग के कपड़े ढीले होना
- 06पीलियाआंखें या त्वचा पीली, पेशाब गहरा, शौच का रंग हल्का — उसी हफ्ते दिखाइए
ये कैंसर पकड़ में कैसे आते हैं
पेट-आंत के ज्यादातर लक्षणों में निर्णायक जांच एंडोस्कोपी है — कैमरे से भोजन नली, पेट या बड़ी आंत को देखना। यह डे-केयर की छोटी प्रक्रिया है। उसी दौरान ली गई बायोप्सी बीमारी की पहचान तय कर देती है। इसके बाद सीटी स्कैन स्टेजिंग करता है: बीमारी कहां तक फैली है और क्या सर्जरी से निकाली जा सकती है। इनमें से किसी के लिए भर्ती होने की जरूरत नहीं, और इनमें से किसी को महीनों टालना भी नहीं चाहिए।
CoreOnco में पेट-आंत के कैंसर का इलाज कैसे होता है
ज्यादातर पेट-आंत के कैंसरों में ठीक करने वाला मुख्य इलाज आज भी सर्जरी है — आंत, पेट या भोजन नली का प्रभावित हिस्सा उसकी गिल्टियों समेत निकाल दिया जाता है। बहुत से मरीजों को कीमोथेरेपी भी दी जाती है: सर्जरी से पहले ट्यूमर छोटा करने के लिए, उसके बाद बीमारी लौटने का खतरा घटाने के लिए, या दोनों समय। यह क्रम ट्यूमर-बोर्ड की चर्चा में तय होता है, आदत से नहीं।
मलाशय और कुछ दूसरे ट्यूमर में कम चीरे वाली और रोबोटिक सर्जरी से छोटे कट लगते हैं और रिकवरी जल्दी होती है। जहां स्टोमा (थैली) की संभावना या जरूरत हो, वहां हम ऑपरेशन से पहले ही यह बात कहते हैं, बताते हैं कि वह थोड़े समय के लिए है या नहीं, और आपको तथा आपके परिवार को उसकी देखभाल सिखाते हैं। यह उससे कहीं कम रोकने वाली चीज है जितना ज्यादातर लोग डरते हैं।
पेट-आंत के कैंसर के इलाज में कितना खर्च आता है?
अपने खर्च पर कराने वालों के लिए आंत, पेट और मलाशय के कैंसर के बड़े ऑपरेशन आमतौर पर ₹1.5 से 4 लाख में होते हैं। जहां जरूरी हो वहां 6 से 8 कीमोथेरेपी साइकिल, और दवाओं के हिसाब से हर साइकिल ₹15,000 से 60,000। स्टोमा बनाया जाए तो सामान का खर्च लगभग ₹2,000 से 5,000 महीना पड़ता है — यह असली आंकड़ा परिवारों को सर्जरी से पहले सुनने का हक है, बाद में नहीं।
आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के पात्र परिवारों के लिए कवर की गई सर्जरी, कीमोथेरेपी और भर्ती हमारे नेटवर्क अस्पतालों में कैशलेस हैं, और पूरा लिखित आंकड़ा भर्ती से पहले तय कर दिया जाता है।
आम सवाल
मुझे सालों से एसिडिटी है। क्या मुझे चिंता करनी चाहिए?
क्या बड़ी आंत का कैंसर ठीक हो सकता है?
क्या मुझे हमेशा के लिए थैली (स्टोमा) लगानी पड़ेगी?
क्या इलाज आयुष्मान भारत में कवर है?
इससे जुड़े इलाज
- 01कैंसर की सर्जरी →साफ मार्जिन के साथ ट्यूमर निकालना — कैंसर को जड़ से ठीक करने वाले इलाज की बुनियाद
- 02रोबोटिक सर्जरी →छोटे चीरे और जल्दी ठीक होने के लिए रोबोट की सटीकता से किए गए ऑपरेशन
- 03कीमोथेरेपी →सर्जरी से पहले या बाद में दवाओं से इलाज — डे-केयर में या भर्ती होकर
- 04टार्गेटेड थेरेपी →आपके ट्यूमर को चलाने वाले खास बदलाव (म्यूटेशन) के हिसाब से चुनी गई दवाएं
- 05दर्द और तकलीफ कम करने वाला इलाज →हर स्टेज पर आराम, सम्मान और लक्षणों पर काबू — सिर्फ आखिरी स्टेज पर नहीं
हमें बायोप्सी की रिपोर्ट भेजिए। हम साफ-साफ बताएंगे कि मामला कहां तक है।
दूसरी राय लेने में आपका कुछ खर्च नहीं होता, और इससे अक्सर इलाज की योजना बदल जाती है। अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप पर भेजिए — आपके पहली बार आने से पहले ही एक कैंसर सर्जन उन्हें देख लेंगे।