सिर और गर्दन का कैंसर
गला, आवाज की नली, थायरॉइड, लार ग्रंथि, साइनस और जबड़ा — इन सबका कैंसर इसी श्रेणी में आता है। ये शरीर के उस हिस्से में होते हैं जिससे हम बोलते, निगलते और सांस लेते हैं। इसीलिए सही इलाज का मतलब सिर्फ ट्यूमर निकाल देना नहीं होता, बल्कि ये तीनों काम बचाए रखना होता है।
संक्षेप में
सिर और गर्दन के ज्यादातर कैंसर अपनी खबर जल्दी दे देते हैं। आवाज बैठ जाना और वैसे ही रह जाना, न भरने वाला छाला, गर्दन में गांठ — संकेत साफ होते हैं। कुछ हफ्तों में जांच करा ली जाए, तो इनका इलाज सबसे अच्छे नतीजे देता है। महीनों टाल दिया जाए, तो इलाज बड़ा भी हो जाता है और मुश्किल भी। नीचे दिया कोई भी लक्षण तीन हफ्ते से ज्यादा पुराना हो, तो उसे दिखा लीजिए।
सिर और गर्दन के कैंसर के लक्षण
- 01गर्दन में गांठबिना दर्द की, धीरे-धीरे बढ़ने वाली सूजन। सबसे आम पहला लक्षण यही है
- 02तीन हफ्ते से ज्यादा आवाज बैठी रहनाआवाज बदल जाए या भारी हो जाए और ठीक न हो
- 03निगलने में दिक्कत या दर्दखाना अटकना, या दर्द का कान तक पहुंचना
- 04मुंह या गले में छाला या कोई उभारतीन हफ्ते से ज्यादा बना रहे, दर्द हो या न हो
- 05एक तरफ कान में दर्द या नाक बंद रहनाखासकर तब, जब साथ में खून मिला स्राव आए
- 06बिना वजह दांत ढीले होना या जबड़े में सूजनदांतों की कोई बीमारी न होते हुए भी
खतरा किन्हें सबसे ज्यादा है
उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा कारण आज भी तंबाकू है — चाहे पी जाए या खाई जाए। शराब इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। हमारे इलाके में मुंह और गले के कैंसर की ऊंची दर के पीछे गुटखा, खैनी और सुपारी हैं। कम उम्र के, तंबाकू न खाने वाले लोगों में गले के कैंसर का एक कारण एचपीवी संक्रमण भी है, और यह बढ़ रहा है। जिनमें ये कारण मौजूद हों और कोई लक्षण बना हुआ हो, वे देर न करें। और तंबाकू लेने वालों को तो बिना किसी लक्षण के भी साल में एक बार मुंह और गले की जांच करा लेनी चाहिए।
CoreOnco में सिर और गर्दन के कैंसर का इलाज कैसे होता है
शुरुआती ट्यूमर अक्सर एक ही इलाज से ठीक हो जाते हैं — या तो सर्जरी से, या रेडियोथेरेपी (सिकाई) से। बड़े ट्यूमर में सर्जरी के साथ गर्दन की गिल्टियां निकालनी पड़ती हैं, क्योंकि कैंसर सबसे पहले वहीं फैलता है। उसी समय दोबारा बनाने की सर्जरी होती है, और उसके बाद आमतौर पर रेडियोथेरेपी, कभी-कभी कीमोथेरेपी के साथ।
हमारे तरीके में खास बात यह है कि ट्यूमर निकालना और उस हिस्से को दोबारा बनाना, दोनों एक ही ऑपरेशन में और एक ही टीम के हाथों होते हैं। बोलने और निगलने की योजना शुरू से ही बना ली जाती है। डॉ. आकाश राजपूत की Tata Memorial की फेलोशिप ट्रेनिंग और माइक्रोवैस्कुलर विशेषज्ञता ठीक इन्हीं ऑपरेशनों के लिए है।
इलाज के बाद आवाज, निगलना और चेहरा
यह सवाल परिवार अक्सर पूछने से डरते हैं, इसलिए हम इसका जवाब बिना पूछे देते हैं। शुरुआती और मध्यम आकार के ज्यादातर ट्यूमर में मरीज की बोली समझ में आने लायक बनी रहती है और खाना-पीना पहले जैसा हो जाता है। जहां आवाज की नली या जीभ का बड़ा हिस्सा निकालना ही पड़े, वहां हम यह बात ऑपरेशन से पहले साफ कह देते हैं। दोबारा बनाने की सर्जरी और रिहैबिलिटेशन की योजना साथ-साथ बनती है, और बोलने-निगलने की थेरेपी ठीक होने के पहले हफ्ते से ही शुरू हो जाती है।
सिर और गर्दन के कैंसर के इलाज में कितना खर्च आता है?
खर्च का दायरा बड़ा है, क्योंकि ऑपरेशन भी कई तरह के होते हैं। अपने खर्च पर कराने वालों के लिए थायरॉइड की सर्जरी लगभग ₹1.5 लाख से शुरू होती है। आवाज की नली निकालने (लैरिंजेक्टॉमी) या दोबारा बनाने की सर्जरी के साथ बड़े ऑपरेशन ₹4 से 5 लाख तक पहुंचते हैं। रिपोर्ट के हिसाब से रेडियोथेरेपी जरूरी हो, तो उसका खर्च इसके ऊपर जुड़ता है। लैरिंजेक्टॉमी के बाद लगने वाला वॉइस प्रोस्थेसिस एक अलग खर्च है — छोटा, लेकिन समय-समय पर आता रहता है।
आयुष्मान पीएम-जेएवाई में पात्र परिवारों के लिए हमारे नेटवर्क अस्पतालों में कवर की गई सिर-गर्दन की सर्जरी, भर्ती और कीमोथेरेपी बिना पैसे दिए (कैशलेस) होती है। यह भर्ती से पहले, लिखित में पक्का कर दिया जाता है।
आम सवाल
क्या गर्दन की हर गांठ कैंसर होती है?
क्या सिर और गर्दन का कैंसर ठीक हो सकता है?
क्या मेरी आवाज चली जाएगी?
क्या इलाज आयुष्मान भारत में कवर है?
क्या बिना किसी लक्षण के भी जांच करा सकते हैं?
इससे जुड़े इलाज
- 01कैंसर की सर्जरी →साफ मार्जिन के साथ ट्यूमर निकालना — कैंसर को जड़ से ठीक करने वाले इलाज की बुनियाद
- 02दोबारा बनाने की और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी →जबड़ा, जीभ और चेहरा उसी ऑपरेशन में दोबारा बनाना — बोली और चेहरा दोनों बचाए रखते हुए
- 03रोबोटिक सर्जरी →छोटे चीरे और जल्दी ठीक होने के लिए रोबोट की सटीकता से किए गए ऑपरेशन
- 04कीमोथेरेपी →सर्जरी से पहले या बाद में दवाओं से इलाज — डे-केयर में या भर्ती होकर
- 05इलाज के बाद रिहैबिलिटेशन →इलाज के बाद बोलने, निगलने और शरीर की ताकत वापस लाना
हमें बायोप्सी की रिपोर्ट भेजिए। हम साफ-साफ बताएंगे कि मामला कहां तक है।
दूसरी राय लेने में आपका कुछ खर्च नहीं होता, और इससे अक्सर इलाज की योजना बदल जाती है। अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप पर भेजिए — आपके पहली बार आने से पहले ही एक कैंसर सर्जन उन्हें देख लेंगे।