मुंह का कैंसर
मुंह का कैंसर यानी जीभ, गाल, मसूड़े, होंठ या जीभ के नीचे के हिस्से में होने वाला कैंसर। भारत में पुरुषों की कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण यही है। अच्छी बात यह है कि शुरुआत में पकड़ में आ जाए तो यह सबसे आसानी से ठीक होने वाले कैंसरों में गिना जाता है।
संक्षेप में
मुंह का कोई छाला या सफेद चकत्ता तीन हफ्ते में न भरे, तो उसे डॉक्टर को दिखा लीजिए। दवा का एक और कोर्स इसका जवाब नहीं है। ऐसे ज्यादातर छाले खतरनाक नहीं होते, यह सच है। लेकिन जो खतरनाक होते हैं, उनका इलाज शुरुआत में पूरी तरह हो जाता है — और छह महीने बाद वही इलाज कहीं बड़ा और कहीं मुश्किल हो जाता है।
ये लक्षण नजरअंदाज न करें
- 01न भरने वाला छालातीन हफ्ते से ज्यादा पुराना। शुरू में अक्सर दर्द नहीं होता
- 02सफेद या लाल चकत्ताजीभ, गाल या मसूड़े पर पड़ा हुआ दाग
- 03मुंह कम खुलनातंबाकू, गुटखा और सुपारी खाने वालों में यह आम शिकायत है
- 04गर्दन में गांठबिना दर्द की सूजन, जो जाने का नाम न ले
- 05दांत ढीले होना या काटने में बदलावदांतों की कोई बीमारी न होते हुए भी
CoreOnco में इलाज कैसे होता है
मुंह के ज्यादातर कैंसरों में मुख्य इलाज सर्जरी ही है। ट्यूमर को चारों तरफ से साफ किनारे (मार्जिन) के साथ निकाला जाता है। गर्दन की लिम्फ नोड यानी गिल्टियां जांची जाती हैं और आमतौर पर उन्हें भी निकाल दिया जाता है। जहां तक हो सके, कटा हुआ हिस्सा उसी ऑपरेशन में दोबारा बना दिया जाता है — माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी यहीं काम आती है। इसके बाद बायोप्सी की आखिरी रिपोर्ट देखकर तय होता है कि रेडियोथेरेपी (सिकाई) या कीमोथेरेपी की जरूरत है या नहीं।
हमारे यहां ट्यूमर निकालने और उस हिस्से को दोबारा बनाने, दोनों काम एक ही सर्जिकल टीम करती है। इसका सीधा फायदा मरीज को मिलता है: बोलना, खाना और चेहरे की बनावट — तीनों की योजना ऑपरेशन से पहले ही बन जाती है, बाद के भरोसे नहीं छोड़ी जाती।
मुंह के कैंसर के इलाज में कितना खर्च आता है?
अपने खर्च पर इलाज कराने वालों के लिए लखनऊ के किसी अच्छे अस्पताल में मुंह के कैंसर की सर्जरी आमतौर पर ₹1.5 से 4 लाख में हो जाती है। अगर उसी ऑपरेशन में जबड़े या जीभ के नीचे के हिस्से को फ्री-फ्लैप से दोबारा बनाना पड़े, तो खर्च ₹2.5 से 6 लाख तक पहुंचता है। ध्यान रखिए, सबसे बड़ा खर्च ट्यूमर निकालने का नहीं होता — दोबारा बनाने का होता है। बाद में रेडियोथेरेपी की जरूरत पड़ी, तो उसका खर्च इसमें शामिल नहीं है।
आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के पात्र परिवारों के लिए हमारे नेटवर्क अस्पतालों में मुंह के कैंसर की सर्जरी, उसी के साथ की गई दोबारा बनाने की सर्जरी, भर्ती और कीमोथेरेपी — सब योजना के पैकेज में आते हैं, और पैकेज व मंजूरी हो जाने पर यह इलाज बिना पैसे दिए (कैशलेस) होता है। भर्ती से पहले हमारे काउंसलर तीन बातें पक्की करते हैं: आपकी पात्रता, संबंधित अस्पताल, और पैकेज की मंजूरी। और हर मरीज को उसके अपने केस का पूरा खर्च, सहमति देने से पहले, लिखकर दिया जाता है।
स्रोत
- Khanna D, Mishra A, Birur P, et al. A prospective study on diagnostic accuracy of technology-enabled early detection of oral cancer and epidemiology of tobacco and other substances use in rural India. Cancer. 2025;131(1):e35702. doi:10.1002/cncr.35702 किस बात के लिए: Lip and oral cavity cancer as the leading cause of cancer death among Indian men.
- Vaish R, Mittal N, Mahajan A, Rane SU, Agrawal A, D'Cruz AK. Sentinel node biopsy in node negative early oral cancers: Solution to the conundrum! Oral Oncol. 2022;134:106070. doi:10.1016/j.oraloncology.2022.106070 किस बात के लिए: Elective neck dissection offering a survival benefit in node-negative early oral cancer — and why we say "usually", not "always".
- Clinical aspects of oral cancer and potentially malignant disorders in South and Southeast Asia. Oral Dis. 2024. doi:10.1111/odi.15008 किस बात के लिए: Tobacco, gutkha and areca nut as the dominant risk factors in this region, and the case for annual screening of users.
आम सवाल
क्या मुंह का कैंसर ठीक हो सकता है?
क्या इलाज के बाद बोलना और खाना पहले जैसा हो पाएगा?
क्या आयुष्मान भारत में इसका इलाज कवर होता है?
मैं तंबाकू खाता हूं। क्या मुझे जांच करानी चाहिए?
इससे जुड़े इलाज
- 01कैंसर की सर्जरी →साफ मार्जिन के साथ ट्यूमर निकालना — कैंसर को जड़ से ठीक करने वाले इलाज की बुनियाद
- 02दोबारा बनाने की और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी →जबड़ा, जीभ और चेहरा उसी ऑपरेशन में दोबारा बनाना — बोली और चेहरा दोनों बचाए रखते हुए
- 03लेजर सर्जरी →शुरुआती घावों को कम से कम नुकसान के साथ सटीक तरीके से हटाना
- 04कीमोथेरेपी →सर्जरी से पहले या बाद में दवाओं से इलाज — डे-केयर में या भर्ती होकर
- 05इलाज के बाद रिहैबिलिटेशन →इलाज के बाद बोलने, निगलने और शरीर की ताकत वापस लाना
हमें बायोप्सी की रिपोर्ट भेजिए। हम साफ-साफ बताएंगे कि मामला कहां तक है।
दूसरी राय लेने में आपका कुछ खर्च नहीं होता, और इससे अक्सर इलाज की योजना बदल जाती है। अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप पर भेजिए — आपके पहली बार आने से पहले ही एक कैंसर सर्जन उन्हें देख लेंगे।