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कैंसर के प्रकार

जीभ का कैंसर

मुंह के जिन कैंसरों का हम सबसे ज्यादा ऑपरेशन करते हैं, उनमें जीभ का कैंसर सबसे ऊपर है। और यही वह कैंसर है जिसमें सर्जरी की गुणवत्ता सिर्फ जान नहीं बचाती — यह भी तय करती है कि आप आगे की पूरी जिंदगी ठीक से बोल और खा पाएंगे या नहीं।

CoreOnco की मेडिकल टीम द्वारा लिखा गया · चिकित्सकीय समीक्षा: Dr. Akash Rajput, MDS, FHNO (Tata Memorial) · अंतिम समीक्षा: 26 अगस्त 2026

संक्षेप में

जीभ पर कोई घाव, छाला या गांठ तीन हफ्ते में ठीक न हो, तो उसे विशेषज्ञ को दिखाइए। कोई और जेल, विटामिन का कोई और कोर्स — इनसे बात नहीं बनेगी। जीभ के ज्यादातर छाले दांत लगने या जलन से होते हैं और खतरनाक नहीं होते। लेकिन जो खतरनाक होते हैं, वे छोटे रहते हुए बहुत अच्छी तरह ठीक हो जाते हैं। एक बार गहरे उतर गए या गर्दन की गिल्टियों तक पहुंच गए, तो इलाज कहीं मुश्किल हो जाता है। सीमा तीन हफ्ते की है। उसके बाद जांच करा लीजिए।

जीभ के कैंसर के लक्षण

  • 01न भरने वाला छाला या घावसबसे ज्यादा जीभ के किनारे पर, और तीन हफ्ते से ज्यादा पुराना
  • 02गांठ या मोटा पड़ा हुआ हिस्साजीभ की नोक या उंगली से महसूस होता है। शुरू में अक्सर दर्द नहीं होता
  • 03सफेद या लाल चकत्ताजीभ की ऊपरी सतह या किनारे पर
  • 04चबाने पर दर्द, या दर्द का कान तक जानायह बाद का लक्षण है। इसके आने का इंतजार मत कीजिए
  • 05जीभ हिलाने में दिक्कत या बोली में बदलावकैंसर के गहरे उतरने का संकेत। तुरंत जांच कराइए
  • 06गर्दन में गांठजीभ का बहाव गर्दन की गिल्टियों तक जल्दी पहुंचता है। जीभ के किसी लक्षण के साथ गर्दन की गांठ हो, तो देर बिल्कुल न करें

जीभ के कैंसर में देरी इतनी भारी क्यों पड़ती है

जीभ में खून की नसें और लसीका वाहिकाएं बहुत ज्यादा होती हैं। इसीलिए जीभ का कैंसर मुंह के बाकी कैंसरों के मुकाबले गर्दन की गिल्टियों तक जल्दी पहुंच जाता है। और गिल्टियों तक पहुंचते ही इलाज बड़ा हो जाता है, नतीजे कमजोर पड़ जाते हैं। एक तरफ "छोटा ऑपरेशन, जिसके बाद सब कुछ लगभग पहले जैसा", दूसरी तरफ "बड़ी सर्जरी, दोबारा बनाने की सर्जरी और रेडियोथेरेपी" — इन दोनों के बीच का फासला अक्सर कुछ महीनों के इंतजार का ही होता है। तंबाकू, गुटखा और सुपारी खाने वालों में खतरा सबसे ज्यादा है, इसलिए उन्हें जीभ के किसी भी लक्षण को दोगुनी गंभीरता से लेना चाहिए।

CoreOnco में जीभ के कैंसर का इलाज कैसे होता है

छोटे और शुरुआती ट्यूमर आसपास के स्वस्थ हिस्से के साथ निकाल दिए जाते हैं, कभी-कभी लेजर से। इसके बाद बोलना और निगलना अक्सर बहुत अच्छा रहता है। ट्यूमर बड़ा हो तो जीभ का कुछ हिस्सा निकालना पड़ता है (पार्शियल ग्लॉसेक्टॉमी) और साथ में गर्दन की गिल्टियां भी। यहीं दोबारा बनाने की सर्जरी सब कुछ तय कर देती है। हम निकाले गए हिस्से को उसी ऑपरेशन में माइक्रोवैस्कुलर फ्लैप से दोबारा बना देते हैं, ताकि बची हुई जीभ अपनी हरकत बनाए रखे। फिर हमारी रिहैबिलिटेशन टीम के साथ मरीज साफ बोलना और सुरक्षित तरीके से निगलना दोबारा सीखता है।

डॉ. आकाश राजपूत ने Tata Memorial में जो फेलोशिप ट्रेनिंग ली और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी में जो विशेषज्ञता हासिल की, वह ठीक इसी ऑपरेशन के लिए है। बोलने और निगलने की थेरेपी सर्जरी के पहले हफ्ते से शुरू हो जाती है। यहां काम करने की क्षमता वापस आना उम्मीद पर नहीं छोड़ा जाता — उसकी योजना बनाई जाती है।

जीभ के कैंसर के इलाज में कितना खर्च आता है?

अपने खर्च पर इलाज कराने वालों के लिए गर्दन की गिल्टियों सहित पार्शियल ग्लॉसेक्टॉमी आमतौर पर ₹1.5 से 3 लाख में होती है। निकाले गए हिस्से को माइक्रोवैस्कुलर फ्लैप से दोबारा बनाना पड़े, तो ₹2.5 से 4.5 लाख। इसके बाद बोलने और निगलने की रिहैबिलिटेशन हम जानबूझकर कम खर्च में रखते हैं — जो इलाज परिवार पैसे की वजह से बीच में छोड़ दे, वह किसी के काम नहीं आता।

आयुष्मान पीएम-जेएवाई के पात्र परिवारों के लिए कवर की गई सर्जरी, दोबारा बनाने की सर्जरी और भर्ती पर ₹0 खर्च आता है। कुछ भी तय करने से पहले आपको आपके अपने केस का सही आंकड़ा लिखकर दिया जाता है।

आम सवाल

क्या जीभ का कैंसर ठीक हो सकता है?
शुरुआत में पकड़ में आ जाए — यानी ट्यूमर छोटा हो और गिल्टियों तक न पहुंचा हो — तो ठीक होने की संभावना बहुत अच्छी रहती है, और बोलना-खाना भी आमतौर पर ठीक बना रहता है। ट्यूमर बढ़ने और गर्दन तक फैलने के साथ दोनों बातें कमजोर पड़ती जाती हैं। तीन हफ्ते वाला नियम इसीलिए है: शुरुआती मौका बाद के किसी भी मौके से कहीं बेहतर होता है।
क्या जीभ के ऑपरेशन के बाद बोल पाना संभव रहेगा?
छोटे ट्यूमर में बोली आमतौर पर पूरी तरह या लगभग पूरी तरह लौट आती है। जीभ का बड़ा हिस्सा निकालना पड़े, तो फ्लैप से दोबारा बनाने की सर्जरी और स्पीच थेरेपी मिलकर ज्यादातर मरीजों की साफ और समझ में आने वाली बोली वापस ले आती हैं। आपके अपने केस में क्या उम्मीद रखनी है, यह ऑपरेशन से पहले ही साफ-साफ बता दिया जाता है।
मेरे नुकीले दांत से छाला हुआ है — क्या फिर भी यह कैंसर हो सकता है?
नुकीले दांत से सचमुच छाले होते हैं, यह सही है। और लगातार होने वाली वही रगड़ अपने आप में कैंसर का एक कारण भी है। नियम फिर भी वही रहता है: दांत ठीक करा लीजिए, और कारण हटने के तीन हफ्ते बाद भी छाला न भरे तो बायोप्सी कराइए। कोई भरोसेमंद वजह मिल जाने से न भरने वाले छाले को और महीने मत दीजिए।
क्या जीभ के कैंसर का इलाज आयुष्मान भारत में कवर है?
हां। पात्र परिवारों के लिए सर्जरी, उसी के साथ की गई दोबारा बनाने की सर्जरी, भर्ती और कीमोथेरेपी आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई में कवर हैं। भर्ती से पहले हमारे काउंसलर आपका कवर जांचकर पुष्टि कर देते हैं।

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अगला कदम

हमें बायोप्सी की रिपोर्ट भेजिए। हम साफ-साफ बताएंगे कि मामला कहां तक है।

दूसरी राय लेने में आपका कुछ खर्च नहीं होता, और इससे अक्सर इलाज की योजना बदल जाती है। अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप पर भेजिए — आपके पहली बार आने से पहले ही एक कैंसर सर्जन उन्हें देख लेंगे।