24 घंटे इमरजेंसी · +91 91965 86931 / 86932 Lucknow · Hardoi · Sitapur · Raebareli · Amethi · Lakhimpur Kheri
EN·हिन्दी
अपॉइंटमेंट बुक करें
होम/कैंसर के प्रकार/छाती और फेफड़े का कैंसर
कैंसर के प्रकार

छाती और फेफड़े का कैंसर

फेफड़े, दोनों फेफड़ों के बीच की जगह (मीडियास्टिनम) और छाती की दीवार के कैंसर। बीड़ी-सिगरेट पीने वाले की खांसी का ढंग बदल जाना — कैंसर की यह शुरुआती चेतावनी सबसे ज्यादा अनदेखी होती है, और सबसे ज्यादा कदम उठाने लायक भी यही है।

CoreOnco की मेडिकल टीम द्वारा लिखा गया · चिकित्सकीय समीक्षा: Dr. S. K. Singh, Surgical Oncologist · अंतिम समीक्षा: 26 अगस्त 2026

संक्षेप में

खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा चल रही हो, उसका ढंग बदल गया हो, या उसमें खून आ रहा हो — तो उसी हफ्ते छाती का एक्स-रे करा लीजिए। जो लोग बीड़ी-सिगरेट पीते हैं या कभी पीते थे, उनके लिए यह और भी जरूरी है। एक्स-रे में खर्च बहुत कम आता है और समय कुछ मिनट का लगता है। शुरुआत में पकड़ा गया फेफड़े का कैंसर निकाला भी जा सकता है और ठीक भी हो सकता है; देर से पकड़ा गया अक्सर निकाला ही नहीं जा सकता। बहुत कम कैंसर ऐसे हैं जिनमें जल्दी जांच का फायदा इतना सीधा दिखता हो।

फेफड़े के कैंसर के लक्षण

  • 01लगातार बनी रहने वाली या बदली हुई खांसीतीन हफ्ते से ज्यादा पुरानी, या "पीने वालों की खांसी" जो अलग तरह की हो जाए
  • 02बलगम में खूनएक बार भी, एक लकीर भी — एक्स-रे हमेशा जरूरी
  • 03हद से ज्यादा सांस फूलनारोज के सामान्य काम में नई सांस की तकलीफ
  • 04छाती में दर्दलगातार बना रहने वाला, या सांस लेने और खांसने पर बढ़ने वाला तेज दर्द
  • 05छाती में बार-बार संक्रमणनिमोनिया जो फेफड़े के उसी हिस्से में लौट-लौटकर आए
  • 06आवाज बैठना, वजन घटना, या चेहरे-गर्दन में सूजनसंकेत कि बीमारी आसपास के हिस्सों पर दबाव डाल रही है

फेफड़े के कैंसर की पहचान और स्टेजिंग कैसे होती है

पहला कदम छाती का एक्स-रे है। एक्स-रे में जो शक उठे, उसे सीटी स्कैन साफ करता है। पहचान पक्की करने के लिए ऊतक चाहिए — ब्रोंकोस्कोपी से, या सीटी की मदद से सुई की बायोप्सी से। आज के इलाज को ट्यूमर की मॉलिक्यूलर प्रोफाइल भी चाहिए, क्योंकि अब दवाएं म्यूटेशन के हिसाब से अलग-अलग होती हैं। इसके बाद स्टेजिंग के स्कैन उस सवाल का जवाब देते हैं जिस पर सब टिका है: क्या इसे निकाला जा सकता है?

CoreOnco में छाती और फेफड़े के कैंसर का इलाज कैसे होता है

जो ट्यूमर ऑपरेशन लायक हों, उनका इलाज सर्जरी से होता है — फेफड़े का एक हिस्सा (लोब) उसकी गिल्टियों समेत निकाल दिया जाता है। छाती के हर बड़े ऑपरेशन के पीछे आईसीयू का सहारा रहता है। और जो ट्यूमर निकाले नहीं जा सकते, वे इलाज से बाहर नहीं हैं। म्यूटेशन वाले कैंसरों में टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी ने पिछले दस साल में नतीजे सचमुच बदले हैं, और कीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी आज भी बुनियादी औजार हैं।

हर केस की स्टेजिंग पहले ईमानदारी से होती है। फेफड़े के कैंसर में दो ही सबसे बुरे नतीजे हैं — एक, ऐसा बड़ा ऑपरेशन जिससे बीमारी पहले ही आगे निकल चुकी थी; दूसरा, उस मरीज को "ऑपरेशन के बाहर" मान लेना जिसके स्कैन कुछ और कह रहे हों। हम आपको वही जवाब देते हैं जो स्कैन का साथ देता हो, चाहे वह किसी भी तरफ जाए।

फेफड़े के कैंसर के इलाज में कितना खर्च आता है?

अपने खर्च पर कराने वालों के लिए फेफड़े के कैंसर की सर्जरी (लोबेक्टॉमी) आमतौर पर ₹2 से 4.5 लाख में होती है। बायोप्सी की मॉलिक्यूलर जांच ₹15,000 से 30,000 की है — और पूरे इलाज में सबसे अच्छी तरह लगाया गया पैसा यही है, क्योंकि यही तय करती है कि कहीं सस्ती चलने वाली टार्गेटेड गोलियां आपके काम आएंगी या नहीं। टार्गेटेड गोलियां एक्सेस प्रोग्राम से पहले हर महीने ₹10,000 से लेकर ₹1 लाख से ऊपर तक पड़ती हैं। इम्यूनोथेरेपी, जहां सचमुच जरूरी हो, हर साइकिल ₹1 से 3.5 लाख।

आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई पात्र परिवारों के लिए सर्जरी, कीमोथेरेपी और भर्ती कवर करता है। नई दवाओं के लिए हमारे काउंसलर हर केस में योजना का कवर और दवा कंपनियों के एक्सेस प्रोग्राम, दोनों जांचते हैं — और सच्चा आंकड़ा पहले लिखकर देते हैं।

आम सवाल

मैंने कभी बीड़ी-सिगरेट नहीं पी। क्या मुझे फिर भी फेफड़े का कैंसर हो सकता है?
हां। फेफड़े के कैंसर का एक अच्छा-खासा हिस्सा उन लोगों में होता है जिन्होंने कभी नहीं पी, और महिलाओं में तो खासकर। घर के अंदर का धुआं, प्रदूषण और आनुवंशिकता — सबकी भूमिका है। न पीने वालों में अक्सर ऐसे म्यूटेशन मिलते हैं जिन पर टार्गेटेड गोलियां अच्छा काम करती हैं। इसीलिए उनमें बायोप्सी की मॉलिक्यूलर जांच और भी जरूरी हो जाती है।
क्या फेफड़े का कैंसर ठीक हो सकता है?
इतनी जल्दी पकड़ में आ जाए कि निकाला जा सके, तो हां — स्टेज 1 और 2 की बीमारी के एक अच्छे-खासे हिस्से को सर्जरी ठीक कर देती है। बढ़ी हुई बीमारी को काबू में रखने के लिए इलाज होता है, और टार्गेटेड व इम्यून थेरेपी से अब अक्सर सालों तक — लेकिन वह कम ही पूरी तरह ठीक होती है। इन दोनों हालतों के बीच का फर्क अक्सर तीन महीने पहले कराया गया एक छाती का एक्स-रे होता है।
बीमारी पता चलने के बाद तंबाकू छोड़ने का क्या फायदा है?
फायदा असली है और तुरंत मिलता है — सर्जरी के बाद बेहतर रिकवरी, कम जटिलताएं, इलाज पर बेहतर असर। छोड़ने से फायदा होने में कभी देर नहीं होती, और हम इसे इलाज का ही हिस्सा मानकर मरीजों का साथ देते हैं।
क्या इलाज आयुष्मान भारत में कवर है?
हां। पात्र परिवारों के लिए फेफड़े के कैंसर की सर्जरी, कीमोथेरेपी और भर्ती आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई में आती हैं। कई नई दवाओं के लिए भी योजना और एक्सेस प्रोग्राम मौजूद हैं, जिन्हें हमारे काउंसलर हर केस में जांचते हैं।

इससे जुड़े इलाज

अगला कदम

हमें बायोप्सी की रिपोर्ट भेजिए। हम साफ-साफ बताएंगे कि मामला कहां तक है।

दूसरी राय लेने में आपका कुछ खर्च नहीं होता, और इससे अक्सर इलाज की योजना बदल जाती है। अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप पर भेजिए — आपके पहली बार आने से पहले ही एक कैंसर सर्जन उन्हें देख लेंगे।